Education Policy
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: शिक्षा, समाज, संस्कृति एवं पर्यावरण (National Education Policy 2020: Education, Society, Culture and Environment)
AUTHOR:
डॉ. प्रवेश कुमार जायसवाल, डॉ. अंजली यादव
DATE ISSUED:
Jun 2026
READ:
English
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SUBJECT:
NEP 2020; Educational Reform; Indian Education System; Culture and Education; Society and Education; Environmental Education; Sustainable Development; Indian Knowledge System; Inclusive Education; Higher Education.
JEL CODE:
EDU034000, EDU040000, EDU000000
LANGUAGE:
English
ISBN:
978-81-686861-0-6
₹600₹690
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₹600
Description
“सा विद्या या विमुक्तये” — अर्थात् वही विद्या सार्थक है, जो मनुष्य को अज्ञान, संकीर्णता एवं अविवेक से मुक्त कर मानवता के उच्च आदर्शों की ओर अग्रसर करे। इसी महान भावना को आत्मसात करते हुए “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020; शिक्षा, समाज, संस्कृति एवं पर्यावरण” शीर्षक संपादित पुस्तक के प्रकाशन के अवसर पर मैं अत्यंत हर्ष एवं संतोष का अनुभव कर रहा हूँ। यह पुस्तक केवल शैक्षिक विमर्श का संकलन नहीं, बल्कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था में हो रहे व्यापक परिवर्तन, सामाजिक उत्तरदायित्व, सांस्कृतिक मूल्यों तथा पर्यावरणीय चेतना का समन्वित दस्तावेज है। इस महत्वपूर्ण कृति को पूर्ण करने में विद्वान शिक्षकों, शोधार्थियों एवं चिंतकों का अमूल्य योगदान प्राप्त हुआ है, जिनके प्रति मैं अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों, समावेशी शिक्षा, मातृभाषा आधारित शिक्षण, कौशल विकास तथा तकनीकी नवाचार को केंद्र में रखकर एक नवीन शैक्षिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए इस पुस्तक में शिक्षा और समाज के परस्पर संबंध, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन, सतत विकास, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय तथा वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारतीय शिक्षा की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर अकादमिक विमर्श प्रस्तुत किया गया है।
महान दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कहा था- “शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि मनुष्य के चरित्र एवं चेतना का विकास करना है।” यह पुस्तक उसी उद्देश्य की पूर्ति की दिशा में एक विनम्र प्रयास है।
मैं पुस्तक के सभी लेखकों एवं शोधकर्ताओं का विशेष रूप से धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ, जिन्होंने अपने मौलिक शोध, अनुभव एवं विचारों से इस पुस्तक को ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी बनाया। साथ ही, सभी समीक्षकों, अकादमिक विशेषज्ञों एवं World Academic Press की टीम का भी हृदय से आभार, जिनके बहुमूल्य सुझावों एवं मार्गदर्शन ने पुस्तक की गुणवत्ता को और अधिक समृद्ध एवं प्रभावशाली बनाया।
मैं अपने स्नातकोत्तर महाविद्यालय मलिकपूरा गाजीपुर के प्राचार्य, प्राध्यापकों,सहकर्मियों, विद्यार्थियों तथा परिवारजनों के प्रति भी कृतज्ञ हूँ, जिनके सहयोग, प्रेरणा एवं उत्साहवर्धन ने इस कार्य को सफलतापूर्वक पूर्ण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अंततः, उपनिषद का यह मंगल संदेश—
“तमसो मा ज्योतिर्गमय”
अर्थात् अज्ञानरूपी अंधकार से ज्ञानरूपी प्रकाश की ओर ले चल — इस पुस्तक की मूल भावना को अभिव्यक्त करता है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह पुस्तक शिक्षकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों, नीति-निर्माताओं एवं समाज के जागरूक पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को समझने एवं उन्हें व्यवहारिक रूप देने में सहायक बनेगी। यह कृति शिक्षा, समाज, संस्कृति और पर्यावरण के मध्य समन्वित संबंधों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास सिद्ध होगी।
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